06 March 2011

Meghvansh Ek Singhavlokan-2



पुस्तक 'मेघवंश एक सिंहावलोकन' एक आकर्षक पुस्तक है जिसे श्री आर.पी. सिंह, आईपीएस, राजस्थान काडर (आईजी रैंक के अधिकारी) ने लिखा है. यह हिन्दी में है और इसमें राजस्थानी महक है. लेखक की साहित्यिक पृष्ठभूमि है. इस पुस्तक में मेघवंश से संबंधित सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक सामग्री शामिल है. किताब का पहला संस्करण विवाद में पड़ा और कुछ मुहावरेदार टिप्पणियों के कारण पुस्तक और लेखक के खिलाफ आंदोलन चलाया गया. परंपरावादियों ने परंपरानुसार इसकी कुछ अभिव्यक्तियों का विरोध किया और इस विवाद को प्रेस और कई अन्य मंचों पर ले गए. यह पुस्तक का संशोधित और दूसरा संस्करण है.

श्री आर.पी. सिंह ने मेरे आग्रह करने पर किताब की पीडीएफ प्रति भेजी है जिसे लिंक कर दिया गया है ताकि पाठकों की पहुँच आसान हो जाए और वे इसका लाभ उठा सकें. पीडीएफ फाइल के लिए नीचे दिए लिंक को देखें. पृष्ठ और फाँट के बड़े-छोटे आकार के लिए फाइल के ऊपर दाईं ओर दिए (+) और (-) के संकेतों का प्रयोग किया जा सकता है.


‘Meghvansh Ek Singhavlokan’ is a fascinating book written by Mr. R.P. Singh an I.P.S. officer (of IG rank) from Rajasthan cadre. It has been written in Hindi with Rajasthani flavor. The writer carries a literary background. The book contains cultural, mythical and historical material on Meghvansh. The first edition of the book got into controversy over a few idiomatic comments and there was agitation against the book and the writer. Traditionalists opposed few expressions in it and as usual the matter was taken to the press and many more forums.  The present edition is revised and improved one.
Mr. R.P. Singh was very kind to send a PDF copy of the book which has been now been linked for easy access and benefit of the readers. Please see this link for PDF file of the book. After opening the you may use (+) and (-) signs, given on the right side of the file, for bigger size of the page and fonts.


मेघवंश एक सिंहावलोकन 

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