22 May 2011

Doomsday - Prophecies of Saints - प्रलय - सन्तों की भविष्यवाणियाँ


Bhagat Munshi Ram
Here is gist of an article written by Bhagat Munshi Ram. It is regarding prophecies made by saints including Baba Faqir Chand.

In 1976 Baba Faqir Chand, in Vaisakhi discourses said that within 5-6 years world population would be reduced to 30-40 percent. That time has passed. The world population did not reduce in India or in the world. Why did he say so?
In Islam it is written that after thirteenth century Doomsday will come. But nothing happened. Lord Buddha had estimated life of Buddhism to be 500 years. Today, the number of followers of Buddhism in the world is higher.
The thought of reduction in world population keeps occurring to people doing inner practices, yogis, sages and saints. Such views come during dreams, inner practices or lower level Samadhi. In year 1966-67, my friend Yogiraj Rameshwar Giri had predicted the world ending up with one third of population remaining.
It rather reveals a mystery. At the time these great men experienced such visions their bodies were in the process of dying. Possibly that was the cause behind such visions. It is a popular saying- ‘It is dooms day when one dies himself’. When the last day falls on someone he thinks the whole world is going to end. It's natural.
Prof. Vashishth of Chandigarh asked Baba Faqir Chand what would happen to the world. His own body was about to end and he died. There could have been its effect on the brain of Baba Faqir.
While making such prophesies saints have good intentions and there is nothing against the world.”

Hope it explains the truth of prophecies as the world continues.
  
संतों की भविष्यवाणियों के बारे में भगत मुंशीराम जी के एक आलेख का सार नीचे दिया है. यह बाबा फकीर सहित अन्य संतों की भविष्यवाणियों के बारे में है.

सन् 1976 के वैसाखी सत्संगों में बाबा फकीर चंद ने कहा था कि 5-6 वर्ष में जनसंख्या 30-40 प्रतिशत रह जाएगी. वह समय गुज़र चुका है. दुनिया की जनसंख्या में कमी नहीं आई. न भारत में और न संसार में. उन्होंने ऐसा क्यों कहा.
इस्लाम धर्म में लिखा है कि तेरहवीं सदी के बाद कयामत आ जाएगी. मगर कयामत नहीं आई. महात्मा बुद्ध ने कहा था कि बौद्धधर्म 500 साल चलेगा. आज संसार में बौद्धधर्म मानने वाले लोग बहुत अधिक हैं.
विश्व की जनसंख्या कम हो जाने के विचार अभ्यासियों, योगियों, साधुओं और सन्तों को आते रहते हैं. स्वप्न में, अभ्यास में या नीचे की समाधियों में ऐसे दृश्य आते हैं. वर्ष 1966-67 में मेरे मित्र योगीराज रामेश्वर गिरी ने कहा था कि संसार की आबादी एक तिहाई रह जायेगी.
इससे एक गहरा रहस्य समझ आता है. इन महापुरुषों ने जब ये दृश्य देखे तो इनके शरीर छूटने वाले थे. संभव है ये दृश्य इसी कारण से हों. कहा भी गया है कि आप मरे जग परलो. जब किसी के अंतिम दिन आते हैं तो वह समझता है कि सारी दुनिया मर गई. यह स्वाभाविक बात है.
चंडीगढ़ के प्रोफैसर वसिष्ठ ने परम दयाल जी से पूछा था कि महाराज दुनिया का क्या होगा. उनका अपना शरीर समाप्त होने को था और वह चला गया. हो सकता है इसका प्रभाव परम दयाल जी के मस्तिष्क पर रहा हो.
जब संत ऐसी भविष्यवाणी करते हैं तो उनकी भावना शुभ होती है. वे संसार के अहित में कोई विचार नहीं रखते.

इससे भविष्यवाणियों की सच्चाई स्पष्ट हो जानी चाहिए क्योंकि दुनिया चल रही है.

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