20 July 2012

Morning walk - evening walk – प्रातः की सैर - शाम की सैर


कई वर्ष से मैंने सुबह की सैर बंद कर दी है. शाम की सैर अच्छी लगती है. सुबह अपने तरीके से जीओ, शाम को अपनी सुविधा से सैर करो.

सुबह की सैर का अर्थ है हाँफती हुई मोटी-मोटी लड़कियाँ और अपनी ताकत से अधिक ज़ोर लगा चुके थके-चुके बूढ़े. लड़कियों का वज़न उनकी शादी में रुकावट है. पार्क में टहलते लड़कों का विचार है कि- वज़न कोई समस्या नहीं यदि उसके बराबर का सोना साथ ले आए. बाग़-बग़ीचों में निठल्ले भी तो होते हैं.

शाम की सैर यानि बूढ़ों का लॉफ़्टर क्लब जो पूरे दिन की लानत को कमज़ोर फेफड़ों की नकली हा..हा..हा.. में वाकई डुबो दे और दो साल अतिरिक्त जीने की दिली तमन्ना को ज़िंदा रखे ताकि कोई तमन्ना निकल जाए.

शाम होते ही पार्क में पीजी (पेइंग गेस्ट) लड़कियाँ अकेली या बॉय फ्रैंड सहित सैर करने आ जाती हैं. ये अधिकतर मोटी नहीं होतीं. घर से निकलते ही मोबाइल कान से लग जाता है और सैर पूरी होने तक वहीं रहता है. इनकी बातें सुनने के लिए जासूसी-वासूसी ज़रूरी नहीं. मोबाइल का स्पीकर बिंदास ऑन रखती हैं. इनकी आवाज़ इतनी फटपड़ है कि मेरे हमउम्र हैरानगी के शिखर पर जा बैठे हैं.

इन खुली आवाज़ों को सुनिए:

एक धाकड़ आवाज़- तू आ, तेरी वाट लगाती हूँ.....जो तूने मेरे सर को कहा है.....उल्लू के पट्ठे.

नाटकीय आवाज़, मेरी माँ कंजूस है यार, पूरे पैसे नहीं भेजती है. खाना लैंड लेडी से माँग-माँग कर खा रही हूँ और वो सब्ज़ी में सिर्फ़ आलू खिला रही है.

दबंगी आवाज़, उसे कह देना गेड़ी रूट पर चक्कर लगाते-लगाते मर जाएगा. हाथ कुछ नहीं आने वाला बल्कि कॉम्प्लीमेंटरी झापड़ भी खाएगा.

ठंडी शालीन आवाज़, मोबाइल के लिए दस-दस पैसे का टुच्चा रीचार्ज दोस्तों से ले रही हूँ. तू न मुझे कोई तरीका बता दे कि मैं मिस्ड एसएमएस भेज सकूँ.

खीझी आवाज़, केले खा कर ज़िंदा हूँ मम्मीईईईईई....मैगी की पेटी जल्दी भिजवा दो माता श्रीईईईईई.

दूसरों के कान बहुत कुछ सुनते हैं लेकिन इन लड़कियों को इसकी परवाह नहीं है. 

कुल मिला कर सुबह-सवेरे के सीन में ऐसी जानदार बातें सुनने को नहीं मिलतीं. शाम की सैर बेहतर है. शाम के सूरज में अधिक रंग होते हैं.