05 October 2012

BAMCEF-1 - बामसेफ-1



बामसेफ़ की स्थापना काशीराम (Kanshi Ram) और डी. के. खापर्डे (D.K. Khaparde) ने सन् 1973 में की थी. इस संस्था के सदस्य अनुसूचित जातियों, जनजातियों और ओबीसी से संबंधित सरकारी कर्मचारी हैं या ऐसे एससी, एसटी और ओबीसी कर्मचारी हैं जो अन्य धर्मों जैसे इस्लाम, सिख, ईसाई आदि की ओर जा चुके हैं. इन्हें मूलनिवासी (Mulnivasi) नाम से संगठित किया जा रहा है.

कई उतार चढ़ाव के बाद आज यह संस्था वामन मेश्राम के नेतृत्व में एक मज़बूत आधार पा चुकी है. बामसेफ़ का लक्ष्य है ब्राह्मणीकल व्यवस्था के बारे में लोगों को जागरूक करना और उसके विरुद्ध संघर्ष करने के लिए तैयार करना. बामसेफ सरकारी कर्मचारियों की संस्था है अतः आंदोलन करने की इसकी सीमाएँ हैं. इसे ध्यान में रख कर एक और संगठन का निर्माण किया गया है जिसे देश अब भारत मुक्ति मोर्चा के नाम से जानता है.

 भारत मुक्ति मोर्चा की बैठक, पुणे

 
कल 23-09-2012 को चंडीगढ़ में बामसेफ का कार्यक्रम देखने का अवसर मिला. इसमें माननीय जे. एस. कश्यप, राष्ट्रीय महासचिव, भारत मुक्ति मोर्चा, नई दिल्ली को सुनना बहुत अच्छा अनुभव रहा. पहले पढ़ चुका था कि गाँधी ने पूना पैक्ट के ज़रिए कैसे दलितों के हितों पर कुठाराघात किया और महात्मा भी कहलाता रहा. साइमन कमिशन का विरोध करने वालों को हम देश भक्त मानते रहे और यह नहीं जान पाए कि उस विरोध के पीछे दलितों का ही विरोध था. पहली बार पता चला कि तिलक और गोखले जैसे लोग अंग्रेज़ों के खिलाफ़ क्यों बोलने लगे थे. उनकी स्वतंत्रता की अवधारणा का अर्थ था सत्ता और पैसे में हिस्सेदारी जो केवल ब्राह्मणों के लिए लक्षित थी. आज़ादी केवल पाकिस्तान को मिली थी. भारत को आज़ादी नहीं मिली बल्कि वह सत्ता का हस्तांतरण था जिसमें सत्ता ब्राह्मणों के हाथों में सौंप दी गई. इसका खुलासा प्रकारांतर से स्वाभिमान ट्रस्ट के राजीव दीक्षित ने भी किया है. शेष पढ़ा हुआ था कि काम निकलते ही कैसे गाँधी (जो जैन था) को कार्य मुक्त कर दिया गया.

जो बातें लोगों को पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाती हैं उसके विरुद्ध तर्क को मन आसानी से स्वीकार नहीं करता. तथापि इस सत्र में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जो कहा गया है वह प्रकाशित साहित्य में उपलब्ध है और उसमें तथ्य है. कुल मिला कर यह जानकारीपूर्ण सत्र था.

मा. जे. एस. कश्यप, राष्ट्रीय महासचिव, भारत मुक्ति मोर्चा
इस अवसर पर प्रदर्शित साहित्य

इस अवसर पर प्रदर्शित साहित्य


इस अवसर पर दी गई प्रैस विज्ञप्ति



 

Megh Bhagat