28 November 2012

Indian Government ji, wake up – भारत सरकार जी, जागो


पोंटी चड्डा के मामले में मेरी नज़र केवल इस तथ्य पर अटक कर रह गई है कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों को एक ही दिन में कई हथियारों के लाइसेंस दे दिए गए. उसके साथ ही बुलंदशहर में एक पति की हत्या (जिसे बदतमीज़ मीडिया अभी भी ऑनर किलिंग कहे जा रहा है) में प्रयोग हुए फायर आर्म्ज़ ने मुझे उन सभी घटनाओं की याद दिला दी है जिनमें यहाँ-वहाँ गली-कूचे में पता नहीं कहाँ से तमंचे, पिस्तौलें, राइफलें निकल आती हैं और खून से सनी लाशें छोड़ जाती हैं.

देश में आर्थिक हालात काफी तेज़ी से बदल रहे हैं. लोगों में ज़बरदस्त असंतोष है और सिस्टम के प्रति घृणा व्याप्त हो रही है. केजरीवाल की एक प्रेस कांफ्रेंस में प्रशांत भूषण ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि देश में गृहयुद्ध के हालात बन रहे हैं. पता नहीं सरकार की मंशा क्या है.

मैं सरकार पर कोई व्यंग नहीं करना चाहता हालाँकि प्रशासन हथियार और लाइसेंस देता है. अब समय आ गया है कि सरकार जारी हथियार वापस ले और उनकी संख्या को न्यूनतम करे. माफिया की नकेल कसे.

देश को भयंकर परिणामों से बचाने की सख़्त ज़रूरत है.


Let us play fire – आओ ठायँ-ठायँखेलें