08 September 2013

Messengers of Death - जमदूत

आम आदमी
सोचा था कि देश में संभावित गृहयुद्ध (Civil war) के बारे में लिखूँ जिसकी चेतावनी प्रशांत भूषण ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी थी........जो बन गई थी 'कल्पनाओं को चीरती हुई सनसनी......' फिर विचार आया कि देश में स्मगल हो कर आ रहे और सरकारी नीतियों के तहत बँट रहे फायर आर्म्स पर कलम की एके-47 चला दूँ (मेरे पास केवल यही है). लेकिन मैं डर गया. इसलिए कबीर वाणी याद कर के अपने उर को शांत कर रहा हूँ.

'....जम के दूत बड़े मरदूद......' 

आम आदमी हथियार बाँटने वालों से क्या कहे सिवाय इसके कि- ''एकदम सामने तो आप ही हो भगवन्! आप ही पूछते हो कि घूँसा पास है या भगवान!! आप सामने हो तो भगवान के पास पहुँचने में कितना समय लगता है?"