20 December 2013

Faith is eventually lost - विश्वास अंततः टूटता है

मैंने विश्वास की शक्ति को महसूस किया है. वह 'भगवान' की है या नहीं मैं नहीं जानता. मैं कई बार ऐसे लोगों के बारे में सोचता हूँ जिन्होंने कभी 'भगवान' (God) शब्द नहीं सुना. कई देश ऐसे हैं जहाँ गॉड शब्द का महत्व नहीं है. वहाँ के लोगों की इच्छाएँ भी पूरी होती हैं. वे भी प्रगति करते हैं. मज़बूत हैं. कई तो ईश्वर को मानने वालों से अधिक मज़बूत हैं और सुखी हैं. यह आत्मविश्वास और सही सोच की वजह से है.

एक और तथ्य भी है कि जब कोई व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से कमज़ोर या बीमार हो जाता है तो उसे एक सहारा दरकार होता है जिसे वह भगवान, डॉक्टर, दवाई, नज़दीकी रिश्तेदार, गुरु, आदि में ढूँढता है और उसे पाता हुआ महसूस करता है. इसे विश्वास की शक्ति भी कह सकते हैं.

कुछ लोग एक के बाद एक देवता पर विश्वास करते हैं या कई देवताओं को पूजते हैं. इसका कारण मैं यह समझता हूँ कि उनका विश्वास एक जगह से हट कर दूसरी जगह आरोपित होता है. इससे भी प्रमाणित होता है कि विश्वास (चाहे वह ईश्वर पर ही क्यों न हो) अंततः टूटने वाली चीज़ है.