25 November 2015

Empowering literature - सशक्त करता साहित्य

मैं कुछ वर्ष पूर्व श्री एम.एल. परिहार के संपर्क में आया था. तब उन्होंने मुझे अपनी "मेघवाल समाज का गौरवशाली इतिहास" नाम की पुस्तक भेजी थी जो श्री Tararam Gautam जी को समर्पित थी. अभी हाल ही में उन्होंने चार और पुस्तकें भेजी हैं जिनमें से एक "Reservation, Affirmative Action and Inclusive Policy" है जिसके लेखक श्री P.C. Haldia हैं. यह अंग्रेज़ी में है. शेष तीन पुस्तकें में से दो श्री परिहार ने लिखी हैं और एक पुस्तक "दलितों को अनपढ़ रखने की साज़िश" उन्होंने संपादित की है जो विभिन्न लेखकों के आलेखों का संकलन है. ये पुस्तकें इस पते पर उपलब्ध हैं-

बुद्धम पब्लिशर्ज़
21-A, धर्म पार्क, श्यामनगर-II
अजमेर रोड, जयपुर-302019 (राजस्थान)

तीनों पुस्तकों के कवर नीचे दिए हैं.

ML Parihar
Mobile No. 09414242059, E-mail - pariharml@yahoo.com
MEGHnet

24 November 2015

Religious Branding - धर्म के ब्रांड

किसी भी आध्यात्मिक गुरु के कम से कम तीन दायरे होते हैं. पहला उसके करीबी हमख्यालों का. दूसरा ऐसे लोगों का जो धर्म के व्यवसायी होते हैं और डेरे-आश्रम की कमाई में से अपने सुख की चाँदी  काटते हैं. तीसरा दायरा सत्संगियों का होता है जो गुरु-ज्ञान के बदले में डेरे-आश्रम को चढ़ावा और अपना समय देते हैं. यह तीसरा दायरा उपजाऊ जमीन की तरह होता है जिस पर सभी अपना-अपना हल चलाने आ जाते हैं. गंदी राजनीति भी अपने हिस्से की फसल काटने के लिए बाड़ तोड़ कर यहाँ घुस पड़ती है.

भक्तजनों! नहीं जानते तो जान लीजिए कि धर्म के धंधे में गला काट प्रतियोगिता है. सत्संगियों को वोटर की तरह कोई ब्रैंड कर सकता है तो उसकी दुकान पर कोई 'देशद्रोही' के इश्तेहार भी चिपका सकता है. जिसे आप 'स्वर्ग' मानते हैं उस पर कोई 'नरक' का साइनबोर्ड लगा कर चंपत हो जाता है. सारा खेल ब्रांडिंग का है जिसके अपने फायदे और नुकसान हैं. कुछ समझा करो यार. तुम शांति, संपत्ति, संपन्नता की तलाश में पद्मासन लगा कर कहीं बैठते हो और कोई तुम पर अपना स्टिकर चस्पाँ करके निकल लेता है.

सत्संगों से बाहर निकलते अधिकतर लोग गरीब और वंचित जातियों या जनजातियों के होते हैं. इन्हें लगता है कि इन्हें गुरुओं की या ईश्वर की सख्त ज़रूरत है. लेकिन आर्थिक खुशहाली माँगने से नहीं सरकार की नीतियों से मिलती है. भक्तजनों!! उम्मीद है आपको ट्यूशन की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ेगी