23 March 2017

Advertise Your Megh - अपने मेघ का विज्ञापन करें

यदि आप काम तो बहुत उम्दा कर रहे हैं और कोई आपको और आपके काम को नहीं जानता तो इसका कारण विज्ञापन की कमी हो सकता है. आप बंदे तो बहुत अच्छे हैं लेकिन दूसरों के बीच आपका वैसा इंप्रेशन नहीं बन पा रहा तो पक्की बात है कि आपने अपना विज्ञापन नहीं किया. यदि आप सोचते हैं कि आपके भीतर बहुत बढ़िया विचारों, भावनाओं, जज़्बातों, उम्मीदों का ख़ज़ाना भरा हुआ है और दूसरे लोग उसे ख़ुद-ब-ख़ुद जान जाएँगे तो आप ग़लती पर हैं. आपको बोलने और अपना विज्ञापन करने की ज़रूरत है.


विज्ञापन की ख़ासियत है कि रिपीट होते रहने पर वो अपना एक ख़ास अर्थ देने लगता है. फिर उस अर्थ के रूप में दूसरों के मन का हिस्सा बन जाता है. थोड़े में कहें तो आप अपने विज्ञापन के ज़रिए दूसरे के दिल-दिमाग़ में जगह बनाते हैं और आगे चल कर आपको उसका फ़ायदा होने लगता है. यह बेहतरीन हो जाता है जब विज्ञापन सही सूचना और अच्छा इंप्रेशन दें. विज्ञापन रोचक, भयानक, आकर्षक और मनोरंजक होते हैं यह आपने देखा होगा.


मेघ समाज अपने ख़ुद के विज्ञापन के प्रति कमोबेश उदासीन रहा है और अब उसे बहुत सचेत रहने की ज़रूरत है. यह समाज ग़रीबी के बावजूद इंसानियत और मानवीय गुणों से भरपूर रहा. विपरीत हालात में जीने की इच्छाशक्ति और जीवट में इस समाज के लोगों का जवाब नहीं. वे शिक्षित हुए तो अपनी ज्ञान-बुद्धि और सूझ-बूझ से कामयाबी की ऊँचाइयों तक पहुँचे. सेना में गए तो अपनी प्रोफेशनल क्षमता की निशानियां छोड़ आए. व्यापार में उन्होंने सफलता हासिल की.


तो मेघ सर, आप अपनी ख़ासीयतों का अच्छे से विज्ञापन क्यों नहीं करते? शुरू कीजिए. इस दुनिया में आइए. अब तो आपके पास सोशल मीडिया है. आपके बनाए हुए कबीर मंदिर हैं जो आपका विज्ञापन हैं. ये आपको पहचान देते हैं.


एक विज्ञापन है जिसमें पहले परिवारों की खुशहाली, शिक्षा के प्रसार, स्वास्थ्य सेवाओं, खेल-खिलाड़ी, संस्कृति विकास आदि की बात है. आखिर में एक छोटी-सी लाइन है- “इस्पात भी हम बनाते हैं”. यह टाटा स्टील का है. अपने कार्य के बारे में दूसरों को बताना और सलीके से की गई ख़ुद की तारीफ़ अपना और अपने समाज का बढ़िया विज्ञापन होता है.

मेघ सर, सुबह हो गई है. अख़बार देखिए. दुनिया विज्ञापनमय है. उसमें अपनी हाज़िरी दर्ज कीजिए.