31 August 2010

Megh Sena





मेघ सेना

भारत में कई सामाजिक और धार्मिक सेनाएँ बनी हैं. इन्हीं में एक नाम और जुड़ा है मेघ सेना का. मेघवाल समाज का संगठन रजिस्टर्ड है और इसकी उपविधि भी है. मेघ सेना इसी की एक इकाई है. 07-02-2009 को राजस्थान में मेघ सेना का गठन हुआ. इसके लिए मेघवाल समाज की एक बैठक की गई जिसमें प्रदेश कार्यकारिणी और ज़िला केंद्र बनाए गए. इसी बैठक में मेघ सेना का ड्रेस कोड और वर्दी निर्धारित की गई. 04-07-2009 को प्रदेश कार्यकारिणी की प्रथम बैठक हुई जिसमें सभी ज़िलों के मेघ सैनिक आमंत्रित किए गए. तारीख़ 31-10-2009 को जयपुर में मेघ सेना का प्रथम फ्लैग मार्च किया गया. फ्लैग मार्च के बाद एक बैठक की गई जिसमें यह संकल्प पास किया गया कि विभिन्न नामों से जानी जाने वाली सभी मेघवंशी जातियों का आपसी संपर्क बढ़ाया जाए और उन्हें एक सूत्र में बाँधा जाए.

इसी सिलसिले में दिनाँक 01-11-2009 को राष्ट्रीय सर्वमेघवंश महासभा का गठन किया गया. इसमें भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया. यह बैठक होटल इंडियाना क्लासिक, जयपुर में की गई. इसमें तय किया गया कि मेघवंशी जातियों के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाने का कार्य शीघ्र निष्पादित किया जाए. कार्यकारिणी बनाई गई. प्रदेश अध्यक्षों के चयन का निर्णय लिया गया. संकल्प पास किया गया कि मेघवंश समाज की विभिन्न जातियों के संगठनों से संपर्क बढ़ा कर उन्हें राष्ट्रीय मेघवंश मंच से जोड़ा जाए और साथ ही मेघ सेना को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित किया जाए.

इसी दिन महिला विंग का गठन किया गया जिसकी अध्यक्षा श्रीमती प्रमिला कुमार (हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज और कंज़्यूमर स्टेट फोरम की चेयरपर्सन) हैं. यूथ विंग भी गठित किया गया और श्री नरेंद्र पाल मेघवाल को इसके अध्यक्ष बनाया गया.

21-03-2010 को राष्ट्रीय सर्वमेघवंश महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें एक फिल्म के निर्माण का फैसला लिया गया ताकि मेघवंशीय संगठनों में एकता की प्रक्रिया तेज़ की जा सके. इसकी पटकथा और गीत लिखे जा चुके हैं. निर्माण की कार्रवाई चल रही है.

दिनाँक 04-07-2010 को कार्यकारिणी और प्रदेशाध्यक्षों की बैठक हुई. तय हुआ कि प्रत्येक प्रांत में सम्मेलन आयोजित किए जाएँ. उक्त योजना के तहत नवंबर और दिसंबर 2010 में पंजाब, राजस्थान (श्रीगंगानगर), हरियाणा (हिसार) और मध्य प्रदेश में उज्जैन या मंदसौर में सम्मेलन आयोजित किए जाएँगे.

विशेष टिप्पणी: भारत में कई सेनाओं का गठन हुआ है. कुछ ने सामाजिक कार्य किया और कुछ हिंसात्मक गतिविधियों का पर्याय बन गईं और कुछ राजनीतिक पार्टियों का महत्वपूर्ण अंग बनीं. मेघ सेना अभी स्वरूप ले रही है. इसकी भूमिका का मूल्यांकन अभी कुछ वर्ष बाद ही हो पाएगा. जहाँ तक मेघवाल समाज का प्रश्न है मेरी जानकारी में है कि इस समाज के लोगों को बारात के मौके पर घोड़ी या कार का प्रयोग नहीं करने दिया जाता. यह गाँवों में होता है. दूल्हे को घोड़ी से उतार कर पीटने या बारात पर पत्थर फेंकने की कई घटनाएँ रपोर्ट हो चुकी हैं. मीडिया ऐसा करने वालों को दबंग जैसे शब्दों से महिमा मंडित करने का कार्य करता है. शिक्षित वर्ग इस विषय में एक मत होगा कि किसी की बारात पर पत्थर फेंकना वास्तव में संवेदनहीन और अनपढ़ लोगों का कार्य होता है.

06-01-2016 को Hindustan Times में छपी एक रिपोर्ट
Megh Sena song







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7 comments:

  1. Hello Sir, Megh and Meghwal are different, they are not belongs to same caste. Do you know what is the difference in between the two. If you don't know then don't post your message in Megh/Bhagat websites. (DP from Chandigarh)

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  2. आदरणीय भगत जी, आपकी टिप्पणी पढ़ी. पहले मैं भी आपके जैसा दृष्टिकोण रखता था. जैसे-जैसे जानकारी बढ़ी मेरा नज़रिया भी बदला. हमारा समस्त भारतीय समाज इसी विचार से बँटा हुआ कि 'वे' अलग और 'हम' अलग हैं या ऊँचे हैं. जब हम विभिन्न सामाजिक समूहों के मूल देखते हैं और उनके आज के संघर्ष को देखते हैं तो उनकी सामाजिक और आर्थिक समानताएँ एवं विषमताएँ समझ में आने लगती है. इतिहास तो नहीं कहूँगा (क्योंकि उसे भ्रष्ट किया जा चुका है) परंतु पौराणिक संकेतों से पता चलता है भारत की सभी दलित जातियों का मूल एक ही है और यह भी कि वे दासों का जीवन जीती आई हैं. स्वतंत्र भारत में उन्हें कुछ अधिकार मिले हैं जिनका प्रयोग करना वे अभी सीख रहे हैं. मेरा समाधान हो चुका है कि भारत की सभी अनुसूचित जातियाँ मूलतः एक ही वंश की हैं. अतः मैं अपने ब्लॉग पर इसी विचार का समर्थन करता हूँ. आपका असहमत होना मेरे लिए महत्वपूर्ण है. आने वाली पीढ़ी देश को बेहतर तरीके से समझेगी इसका भी मुझे विश्वास है. आपकी टिप्पणी से मैं आपके पते तक पहुँच नहीं पाया इसलिए यहीं उत्तर दे रहा हूँ. टिप्पणी के लिए बहुत धन्यवाद.

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  3. respected bhushanji, I fully endrossed your views. In rajasthan as well as Gujarat's meghwal community is believed that they were originated from Megh Rishi as belived by Megh community in Punjab & J &K.So in my view we all should sit together and enhance our circle by de-limiting borders of the states. Dinesh Kumar, Mumbai

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  4. Not only in one or two States but all most in the whole nation Megh, Madiga, Meghwal and other related castes are from the same origin. Rishis are our local spiritual leaders and they had made attempts to develop the community in some areas with his spiritual ideology. they have protected the community from antiwaves of the aryans from time to time. it is unfortunate for the community if ill supported statements are given. we shall be glad if you provide the evidence of separation of these communities.

    local proplems shouls not be involved with the national sentiments. Megh or Meghwals or madigas are the greatest power of this nation and are a single breed , clan, caste , single profession, single origin

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  5. @ Thanks GL for your explanatory comments.

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  6. @ Anonymous. Thanks Dinesh Kumar ji for your comments.

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  7. My dear friend,

    I am a Brazilian man, 52 years old, a retired university professor, now a farmer and a sincere spiritual seeker.
    I have been trying to get in touch with somebody belonging to your religion for many years now and written to many addresses and never got an answer.
    I would really love to receive any printed literature in English, please. I really need this.
    I am very sorry, but I live in a farm, far away from town and have no Internet. The one I connect to, in town, (when I come here once a month, or so) is very slow, no speed enough to download anything, not even a picture. Because of this I need printed material, if you have it available, please!
    My postal address is as following:

    Sinfronio Alves Vieira

    Caixa postal 114

    CEP 74001970 Goiania, Goias, Brazil

    Thank you for your precious attention.

    Love,

    Sinfronio Alves Vieira

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