24 May 2011

In search of inner peace - इसे भी शांति की तलाश है


नेट पर 'आत्मिक शांति (spiritual peace)' तलाशने के दौरान यह मिल गया. सुखद आश्चर्य हुआ और परेशानी भी. परंतु इसकी शान में कुछ कहना चाहता हूँ.
हैलो डॉगी, ध्यान से देखने पर तुम किसी फोटोशॉपियन की दुम लगते हो और सीधे मेरुदंड के पीछे तुम्हारी अपनी दुम बाँकी प्रतीत होती है. तुम्हारे बैठने का स्थान उसी फोटोशॉपियन ने अपनी दुम से बुहारा लगता है.
तथापि हे स्वर्गातुर कुत्ते....! तुम त्याग-मार्ग पर गए तो कैसे चलेगा. घर की रौनक गई कि गई. बच्चों का टाइगर....लुप्त. मोहल्ले के परहरेदार निद्रा में और तुम समाधि में....तो हो गया समझो.
पाप की गठरी किस की भरी यह दुनिया जानती है. तुमने वैसा कुछ नहीं किया, बिलकुल नहीं किया......अहो निष्पाप! तुम्हें आदमी ने काटा है अथवा सताया है. अन्यथा इस मुद्रा में कोई नहीं बैठता. यूँ ही कोई बेवफ़ा नहीं होता......कुछ-कुछ वैसा.
ध्यानस्थ हो कर तुमने इस सनातन सूत्र को, जो मैंने लगनपूर्वक शर्मा सर की क्लास में पढ़ा था, तार-तार कर दिया-
काक चेष्टा बको ध्यानं श्वान निद्रा तथैवचः....
तुमने अपनी विशेषता बनाए रखी लेकिन बगुले की ध्यानधर्मिता को हाईजेक कर ले गए......तुम्हें रास्ते पर लाने के लिए 'शोले' वाले धर्मेंद्र सर ही कुछ कहें तो कहें....'कुत्ते'....'कमीने'.....
परंतु मैं उस फोटोशॉपियन को भूल नहीं पा रहा. हाथ आ जाए तो उसे भी 'शराबी' वाले अमिताभ बच्चन सर के हवाले करूँ ताकि वे उसे कह सकें कि 'कहाँ तुम शरीफ़ कुत्ते कहाँ वो योगमुद्रित आदमी....ढिश्शूँ....ढिश्शूँ....ढिश्शूँ....'

MEGHnet

23 comments:

  1. ये लेख अपने डागी को भी पढवाता हूं

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  2. net par shanti are wahh ye bahut hi achi baat hai
    hum bhi paryas karenge

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  3. अरे वाह ये तो बहुत ही शानदार और ज़बरदस्त पोस्ट रहा! अब डोगी भी ध्यान करने लगे क्या बात है! कमाल का चित्र!

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  4. आदरणीय श्री भारत भूषण भगत जी
    नमस्कार,
    बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती!
    और चित्र तो कमाल का है!

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  5. आद.भूषण जी,
    बातों बातों में ही आप बहुत कुछ कह गए !
    सच और सुन्दर!
    आभार !

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  6. bahut badiya chitramay prastuti..
    sabko shanti chahiye..

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  7. बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती|आभार|

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  8. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती आभार |चित्र तो कमाल का है! शांति जब जानवर को नहीं मिली तो मानव को कैसे मील सकती है

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  9. This post is full of sarcasm.... In a very funny way its showing that how desperately everyone is running after peace.

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  10. *संदीप जी
    *संजय जी
    *बबली जी

    आप का आभार,

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  11. *राजपुरोहित जी
    *मर्मज्ञ जी
    *कविता रावत जी
    आपका बहुत आभार.

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  12. बहुत ही अच्‍छा ।

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  13. एक फोटोशोपियन के बहाने आपने अपने सर को तो याद कर ही लिया .

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  14. मजेदार चित्र

    उम्दा प्रस्तुती
    आभार !

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  15. Dear Bhushanji,good post on yoga,Inside awareness of mind is essential for our life style and art of living,so that purification of mind is important for human beings,one can free from worldly bondage and craving.
    Kabir saheb ne kaha hai:-Man ke hare har hai,man ke jite jit,kahe Kabir guru paiye,man hi ke pratit.
    From...Nitin...Jamnagar...
    Once mind comes in the sphere of wisdom,its ignorance goes away and it attains ultimate joy of true knowledge.

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  16. * Kavita
    * Sarita ji
    * Sada
    * Patali
    * Rajpurohi
    * Jyoti
    * Vivek
    * Nutan
    * Rekha
    * Nitin
    * Hardip
    आप सभी का आभार

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  17. बहुत दिनो बाद कुछ हट कर पढ़ने को मिला,बढ़िया पोस्ट बधाई

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  18. * पल्लवी, धन्यवाद. आशा करता हूँ कि मेरे लिखने की शैली और विषयों में अब परिवर्तन आना चाहिए.

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  19. भूषण जी, भारतवर्ष की अभी जो हालत है ... उससे यही लगता है कि जब चोर-डकैतों को स्वर्ग मिल रहा है तो कुत्ते-बिल्ली क्या कम है ... बढ़िया पोस्ट !

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