27 July 2012

Aboriginals of India killed again - भारत के मूलनिवासी फिर मारे गए


अनुसूचित जनजातियों के प्रति हमारा रवैया कैसा है उसका नमूना फिर असम में देखने को मिला. वहाँ हाल ही में हुई हिंसा में अब तक 41 लोग मारे गए हैं और हिंसा दूर-दराज़ के इलाकों में पहुँच गई है. दो लाख आदिवासियों को घर छोड़ कर भागना पड़ा है. हमले का उद्देश्य बोडो आदिवाससियों की ज़मीन पर कब्ज़ा करना था.

हमलावरों को पहले बंगलादेशी मुस्लिम बताया गया लेकिन बाद में पता चला कि वे स्वदेशी हैं और उन स्वदेशियों को इस बात का दुख है कि उन्हें बंगलादेशी कहा गया है.

हमलावर कोई भी रहा हो लेकिन मूलनिवासियों पर हमला हुआ है, उनकी ज़मीनें छीन लेने के लिए हमला हुआ है. चूँकि छीनी गई ज़मीनें अकसर वापस नहीं की जाती हैं अतः इस समस्या को इसी दृष्टि से देखना ज़रूरी है. यदि ये आदिवासी ऐसे ही उजड़ते रहे तो इंसानों की बस्तियों का क्या होगा?

आपको नहीं लगता कि भारत के ये आदिवासी केवल गणतंत्र दिवस पेरेड की झांकियों के लिए ही बचा कर रखे गए हैं और केवल वहीं अच्छे दिखते हैं? नहीं न?
 
काश! इन तक स्वतंत्रता का उजाला पहुँचता, इनके घरों तक विकास पहुँचने दिया जाता और ये भारत के लोकतंत्र में सुरक्षित महसूस करते. यदि ये नागरिक सुरक्षित नहीं, इनके घर सुरक्षित नहीं तो भारत के नागरिक कैसे समझ पाएँगे कि नक्सलवाद के पीछे लगे लोग ग़लत हैं.




8 comments:

  1. Fauji ✆ to me

    तथाकथित धर्मनिरपेक्षी इसे बोड़ो और गैर बोड़ो बता रहे हैं. लेकिन सत्य यही है कि बांग्लादेशी ही बोड़ो आदिवासियों पर हमले कर रहे हैं. अब कोई भी रहा हो लिखने से काम चलाओगे तो अस्तित्व भी नहीं बचेगा आने वाले समय में भूषण जी.

    ReplyDelete
    Replies
    1. ढूँढने पर आपका पता नहीं मिला फौजी भाई. आपकी इस बात में दम हो सकता है कि असम में बंगलादेशी आदिवासियों पर हमला कर रहे हैं. लेकिन बाकी राज्यों का क्या?
      आपकी बात काफी टेढ़ी है जिसे मैं समझ पा रहा हूँ.

      Delete
  2. मूल संकट उस भयंकर गरीबी में है जिसे कोकराझार इलाके के लोग सह रहे हैं। जब हम गरीब से चोरों और पुलिस द्वारा कैद कर लिए गए नक्सलियों के चेहरे को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि यह चोर नहीं है इसके पीछे इसकी गरीबी है।

    ReplyDelete
  3. आपकी बात से सहमत हूँ ... बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...

    ReplyDelete
  4. असम न जाने के लिए निर्देश जारी किया जा रहा है .. प्रधानमन्त्री जी हाल-चाल ले ही लिए अब किस बात की चिंता..?

    ReplyDelete
  5. बिलकुल सही - मुद्दा यही है की आखिर भारत के मूल निवासी ही मारे गए है. जो भी हो यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है. यह कोई एक घटना है है या किसी घटना का प्रत्युतर नहीं है. यह पूर्व नियोजित, सरकार द्वारा पूर्ण समर्थित है है. अगर सरकार चाहे तो २४ घंटे में सभी कुछ सामान्य हो सकता है. वास्तविक अपराधियों को सजा मिल सकती है. किन्तु भारत देश में यह हो नहीं सकता है. उन गरीब आदिवासियों जिनकी जमीन, घर, जंगले चले गए है उन्हें इस जन्म तो ये सब वापस मिल नहीं सकता है.

    ReplyDelete