11 August 2015

Megh Caste - मेघ जाति

इस साइट पर अधिकतर मेघवंश के इतिहासिक और कहीं-कहीं उससे जुड़ी पौराणिक कहानियों की बात की गई है. मेघवंश मूलतः एक रेस (Race) है जिसमें से बहुत-सी जातियाँ निकली हैं जो भारत के लगभग सभी प्रदेशों में बसी हैं. उनके कई नाम ऐसे हैं जिन्हें भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में रहने वाले और ख़ुद को मेघ कहने वाले लोग स्वीकार ही नहीं कर पाते. इसकी वजह यह मालूम पड़ती है कि इस बारे में कोई जानकारी उन्हें तत्काल नहीं मिल पाती. लेकिन मेघवंश तो अन्य देशों में भी विद्यमान है.  गूगल करने पर कुछ न कुछ जानकारी मिल जाती है. वैसे 'मेघ' शब्द का एक अर्थ 'कबीला (Tribe)' भी है.

भारत में बसे कई 'वंशों' का 'जातियों' में बँटवारा ब्राह्मणीकल व्यवस्था की देन है. मेघवंश का एक टुकड़ा यानि 'मेघ जाति' उसी व्यवस्था से बनी है जो अधिकतर जम्मू और पंजाब में बसी है. हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल और यूपी में भी इस जाति के लोग बसे हैं.

पंजाब और जम्मू-कश्मीर में बसी 'मेघ जाति' पर पहली विस्तृत और प्रामाणिक जानकारी डॉ. ध्यान सिंह के शोध ग्रंथ के रूप में उपलब्ध हुई जिसे आप इन लिंक्स पर क्लिक करके या गूगल सर्च में Kabirpanthis's of Punjab या Dr. Dhian Singh - History of Meghs/Bhagats टाइप करके ढूँढ सकते हैं. दूसरी पुस्तक श्री एम.आर. भगत की लिखी पुस्तक मेघमाला Meghmala है. इसे हम मेघ जाति का इतिहास चाहे न कह पाएँ लेकिन इसमें मेघ जाति के बारे में काफी जानकारी मिल जाती है. जम्मू के एक अन्य सज्जन ने मेघों की स्थिति पर एक आलेख की रचना ''इस्तगासा--राष्ट्रपति'' के नाम से की थी. लेकिन इसे देखने का सौभाग्य मुझे अभी तक प्राप्त नहीं हुआ.

श्री आर.एल. गोत्रा के लिखे लंबे आलेख Meghs of India में मेघवंश के प्राचीन इतिहास के साथ-साथ पंजाब-जम्मू-कश्मीर की मेघ जाति का कुछ आधुनिक इतिहास आपको मिल जाएगा.



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