02 March 2011

Kabir Gyan Divas - Give people a pleasent climate - कबीर ज्ञान दिवस - लोगों को सुहावना मौसम दें – एक सुझाव




The birth anniversary of Satguru Kabir Saheb will be falling on 15 June. Preparations are on. Last year I saw those celebrations in Jammu
जून 15 को सत्गुरु कबीर साहेब का जन्मदिन आने वाला है. तैयारियाँ चल रही हैं. पिछले वर्ष मैंने जम्मू में यह उत्सव देखा था.
It was scorching sun on the head - hands held banners of 'Jai Kabir'
सिर पर थी धूप - और हाथों में जय कबीर के झंडे
These little girls took the sun on their cheeks
इन्होंने तो धूप को गालों पर लिया
Children remembered to smile in front of camera.
कड़ी धूप मे ये बच्चे कैमरा के सामने मुस्कराना नहीं भूले
 

June was too hot for such celebrations. It was 43 degrees outside and people sat there from 09 AM to 04 PM. About five thousand people participated. About three thousand people sat continuously. They took municipality water or purchased bottled water which cost 10-12 rupees. Their patience and dedication is appreciable. Obviously many people did not dare come out of their houses due to hot climate. Attendance was much less than the possible one.

Anniversaries of most of the Dalit Saints have been fixed/shifted to May-June. Extreme summer is discouraging factor. Sweet Cold water (छबील) is served on such days.

It is better to celebrate the main function in the month of October preferably on a Sunday falling five or six days before or after full moon. This day can be celebrated as Kabir Realization Day. A day falling 2-3 days before full moon of the day of full moon should be avoided.

Leaving aside seasonal festivals all other celebrations regarding Saints should given a pleasant climate. People will get encouraged.

Please do not have any intention to test people's devotion. It is harmful.

ऐसे बड़े समागम के लिए जून का मौसम बहुत गर्म था. 43 डिग्री तापमान में सुबह 9 बजे से सायं 4 बजे तक लगभग पाँच हजार लोगों ने सहभागिता की. लगभग तीन हज़ार लोग लगातार बैठे रहे. वे म्युनिसपैलिटी का पानी पी रहे थे या पानी की बोतलें 10-12 बारह रुपए में खरीद-खरीद कर पी रहे थे. उनकी श्रद्धा और सहनशीलता की प्रशंसा करनी होगी. ज़ाहिर है कई लोग मौसम के कारण घर से नहीं निकले. जितनी शिरक़त संभव थी उससे कम रही.

कई महापुरुषों के जन्मदिन मई-जून में पड़ते/कर दिए गए हैं. गर्मी हतोत्साहित करने वाला फैक्टर है. उस दिन छबीलें लगती हैं.

मुख्य समारोह अक्तूबर में पूर्णमासी से पाँच-छः दिन पहले या पाँच-छः दिन बाद में आ रहे रविवार को मनाना बेहतर होता है. यह समारोह कबीर ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जा सकता है. पूर्णिमा से तीन दिन पहले से लेकर पूर्णिमा तक का समय रखें.

मौसमी त्यौहारों को छोड़ शेष सभी समारोहों को सुहावना मौसम देने का प्रयास करें. इससे जनता में उत्साह बढ़ेगा.

कृपया लोगों की श्रद्धा की परीक्षा न लें. यह हानिकारक है. 


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