06 January 2011

Bonded Labour, Forced Labor - Caste based slavery - बंधुआ मज़दूरी, जबरन मज़दूरी - जाति आधारित ग़ुलामी

दासता के समकालीन रूपों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने मानवाधिकार परिषद को 2009 की रिपोर्ट में इन कड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा किअंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा किए गए अनुसंधान से बेगार और एशियाई देशों में दीर्घकाल से चले आ रहे भेदभाव के पैटर्न में एक साफ़ रिश्ता दिखता है. भारत में, कृषि, ईंट बनाने, खनन और अन्य क्षेत्रों में बंधुआ मजदूरी के पीड़ितों की भारी संख्या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से है (A/HRC/12/21).


अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने जबरन मज़दूरी को ऐसी सेवा या किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया है जो अनैच्छिक रूप से किया गया हो और धमकी या दंड के तहत किया गया हो. बंधुआ मज़दूरी आमतौर पर आर्थिक आवश्यकता और अन्य बाहरी कारणों जैसे गरीबी, सामाजिक बहिष्कार और मानवाधिकारों के हनन का परिणाम है. बंधुआ मजदूरी विभिन्न परंपराओं और ज़बरदस्ती से प्रबलित होती है और इसे परिवार के अन्य सदस्यों पर भी लागू किया जा सकता है, उदाहरण के लिए बच्चों और विवाहजनित परिवार के सदस्यों पर. अक्सर, मजदूरों को उनके अपने काम के मूल्य और उन पर चढ़े ऋण की स्थिति के बारे में पता नहीं होता है यह कई कारणों में मुख्य कारण है जिसकी वजह से वे जीवनभर के लिए बंधुआ बन जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों में बंधुआ होने को मजबूर श्रम (Forced Labor) के रूप में चिह्नित किया जा सकता है.

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