03 September 2011

Hindi Officer alias tera kya hoga Kalia - राजभाषा (हिंदी) अधिकारी-उर्फ़-तेरा क्या होगा कालिया




अचानक मुझे भारत के एक दबे कुचले संवर्ग की याद हो आई. सरकारी कार्यालयों में एक अलग रंग का कबीला है जिसे हिंदी स्टाफ़ कहा जाता है. सभी कार्यालयों में आम धारणा है कि दफ़्तर में यदि हिंदी में कुछ किया जाना है तो यही कबीला करेगा. अँग्रेज़ कबीला हिंदी को छूने का कार्य नहीं करेगा.

सौ-दो सौ स्टाफ़ वाले कार्यालय में कितना हिंदी स्टाफ़ होता है. दो नहीं तो चार. अंग्रेज़ी स्टाफ़ बहुसंख्यक समुदाय बना रहता है. वह जब चाहे हिंदी कबीले को अनुवाद की गठरी से ओवरलोड कर दे, जब चाहे दबाव बना दे- यू डू इट इन हिंदी बाबा!! व्हॉट फॉर यू आर हियर?’ बैंकों के कई हिंदी अधिकारी अब जनरल बैंकिंग करते हैं और फील्ड में जा कर ऋण वसूली का कार्य देखते हैं तिस पर हिंदी स्टाफ़ होने की तोहमत भी उठाए फिरते हैं. सिग्नल गए हैं कि बिज़नेस पहले बाकी बाद में. संसदीय राजभाषा समिति सब जानती है.

कंप्यूटरों से पहले टाइपराइटर सारा-सारा दिन अंग्रेज़ी में टिपटिपाते थे. अब कंप्यूटरों आए तो उन संग अंग्रेज़ी ठुमकती हुई आ पधारीं. अफ़सर तुरत कंप्यूटर पर अंग्रेज़ी की-बोर्ड के निःशब्द ताल पर थिरकने लगे. पता चला कि उसी की-बोर्ड पर हिंदी भी थिरक सकती है तो उन्हें हिंदी की सरकारी नौटंकी में शामिल होने का ख़ौफ़ सालने लगा. ये हिंदी को ऐसा गटर समझते हैं जिसमें उनका पाँव नहीं लगना चाहिए.

हिंदी अधिकारी ने हिंदी की नौकरी करनी है और कार्यालय प्रमुख को हरगिज़ नाराज़ नहीं करना है. कोई हिंदी में काम नहीं करता या कार्यान्वयन में कोताही करता है, तो करे. हिंदी का करबद्ध काडर सेवा में है.

अवास्तविक आँकड़े देने में हिंदी स्टाफ़ और अंग्रेज़ी स्टाफ़ की मित्रता प्रगाढ़ है. हिंदी अधिकारी वास्तविक आँकड़े प्रस्तुत करे तो कार्यालय प्रमुख कहता है, भाई मेरे मुझे भी नौकरी करनी है, तुम्हें भी करनी है. प्रधान कार्यालय को जवाब देना है और दफ्तर भी चलाना है. इन आँकड़ों को अपने कृपालु हाथों से ठीक कर लो यार.....या फिर यही कार्यालय प्रमुख कहते हैं, मिस्टर हिंदी ऑफिसर, तुम्हारी कितनी सर्विस हो गई है? तुम अपने साथियों से हिंदी में काम नहीं करवा सकते? यू आर टोटली इनइफ़ेक्टिव....क्या बोलते हैं.....अप्रभावी हो!!” यही कार्यालय प्रमुख साल में कई बार सभी से हिंदी में काम करने की अपील करते हैं. जब कैबिन में होते हैं तो अपने साथी अधिकारियों को सदा उत्साही आवाज़ में कहते हैं, पहले काम, हिंदी-विंदी बाद में. देख लेंगे जो गोली चलेगी.

हिंदी स्टाफ़ खटता फिरता है. हिंदी में करवा लीजिए न सर जी. यह एकदम शाकाहारी कबीला है. हिंदी अधिकारी के लिए इबारत बहुत साफ़ है- हिंदी लागू हो या न हो लेकिन तुम लगे रहो मुन्ना भाई.


कार्यालयों में शतप्रतिशत कार्य हिंदी में होने लगा है. इस बीच हिंदी अधिकारी की कनपटी पर RTI के गब्बर सिंह की रिवाल्वर आ सटी है- तेरा क्या होगा कालिया हः हः...हः हः...'

28 comments:

  1. जी वक्त आ गया है हिंदी के श्राद का ........... उसी अनुसार बेहतरीन लेख.

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  2. हिंदी लागू हो या न हो लेकिन तुम लगे रहो मुन्ना भाई’.

    सटीक और सामयिक व्यंग्य किया है सर।

    सादर

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  3. बहुत सटीक और सार्थक प्रस्तुति..

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  4. ha ha ha ha .
    vyangatmak andaaz badiya raha .

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  5. Loved reading the article! Presents the realistic picture with sarcasm and light humour!

    Jai Hindi, Jai RTI

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  6. हर जगह तो ऐसा ही होता है। क्या करें, यही सोच रहे हैं और रोज अपना सिर नोच रहे हैं।

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. आपने तो मेरी ही व्यथा उतार दी!

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  9. एक दुर्भाग्य ,एक विडंबना -मगर एक त्रासदी इससे भी बड़ी है -कई हिन्दी अधिकारी, यहाँ तक कि आज तक मैं इस विशिष्ट प्रजाति के जितने भी नुमायिन्दों से मिला हूँ उन्हें हिन्दी ही ठीक से नहीं आती -ऐसे अनुवाद करते हैं कि माथा भन्ना जाता है! जरा ordinarily resident की हिन्दी उनसे पूछिए -एक ने मुझे बताया मामूली तौर पर निवासी !

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  10. ये बात तो शत प्रतिशत सत्य है सर, हिंदी के साथ हो रहा ये दोगला व्यवहार अफसोसजनक है| और जो लोग थोडा बहुत हिंदी का इस्तेमाल करते भी हैं उनकी हिंदी कितनी शुद्ध है ये सर्वविदित है | मुझे एक बात आज तक समझ में नहीं आई की क्या हमारे मुल्क में भाषाओँ का आकाल पड़ गया है जो हमें गैर मुल्कों की भाषा अपनानी पड़े |देश के बाहर अंग्रेजी का प्रयोग फिर भी समझ आता है, पर अपने देश के अंदर ही अपने देश की भाषा ना बोलना, ये तो सरासर कही ना कहीं देश का ही तो अपमान है|

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  11. हालात लम्बे समय तक ऐसे ही चलने वाले हैं।
    अरविंद मिश्र जी सभी हिंदी अधिकारी एक से नहीं हैं...कुछ हिंदी अधिकारी जरुर इस स्तर के हो सकते हैं,जो शायद खुद हिंदी की पोस्टों की खानापूर्ति में भर्ती हुए हैं।

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  12. हिन्दी के लिए किए जा रहे तमाशे की असलियत आपने प्रकट कर दी है। कागज़ों में सब हो रहा है , वास्तव में हिन्दी राज्य भी कोई बेहतर काम नहीं कर रहे है।

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  13. ईमेल से प्राप्त कमेंट-

    ASHOK KR. MISHRA. ✆ to me

    सर जी आपने तो दिल की बात कह दी है ...
    ‘तेरा क्या होगा कालिया हः हः हः हः...'

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  14. पोस्ट का शीर्षक अच्छा है और जिस फ़िल्म से लिया गया है उसका नाम भी ‘हिंदी‘ में नहीं है लेकिन कहलाती है फिर भी हिंदी फ़िल्म ही।
    मुग़ले आज़म और उमराव जान को भी हिंदी फ़िल्म ही का प्रमाण पत्र दे देते हैं।

    क्या है हिंदी ?

    कहां है हिंदी ?

    शुक्रिया !
    तर्क मज़बूत और शैली शालीन रखें ब्लॉगर्स :-
    हमारा संवाद नवभारत टाइम्स की साइट पर ,


    दो पोस्ट्स पर ये कुछ कमेंट्स हमने अलग अलग लोगों के सवालों जवाब में दिए हैं। रिकॉर्ड रखने की ग़र्ज़ से इन्हें एक पोस्ट की शक्ल दी जा रही है।

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  15. हिंदी का सत्यानाश तथाकथित हिंदी अधिकारी ही कर रहे हैं।
    बढ़िया व्यंग्य।

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  16. कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  17. बहुत सटीक व्यंग्य और सार्थक प्रस्तुति!
    "तेरा क्या होगा कालिया" ha h hhhhhhhhhhhhhhhhh

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  18. आपने बहुत सही लिखा है ....सार्थक और प्रासंगिक

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  19. जी ....
    सितम्बर माह में तो
    दफ्तरों में हिंदी का जोर अचानक बढ़ने लगता है
    कार्यालय के हिंदी विभाग वाले
    अचानक सचेत हो उठते हैं ...
    आजकल ,, यही विधान मान्य है !!

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  20. हिंदी की अर्थी निकल रही है , इन अधिकारिओ से ! सार्थक पोस्ट !

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  21. सारगर्भित लेख....

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  22. बहुत खूब! मजेदार! :(

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  23. बहुत सटीक प्रस्तुति!
    ....धन्यवाद!

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  24. Every Indian should respect their mother tongue but every indian should also learn english . English is the only language which can unite indians and it is also the source of knowledge and information .

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  25. बहुत दिनों में गुत्थी सुलझी !
    रोचक!

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  26. what is this .i cant understand anything

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